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Thursday, 13 July 2017

महारुद्र रुद्राक्ष

महारुद्र रुद्राक्ष

महारुद्र रुद्राक्ष को स्‍वयं भगवान शिव का अंश माना जाता है। कहते हैं कि महारुद्र रुद्राक्ष को अपने पास रखने से जीवन के सारे कष्‍ट और संकट दूर हो जाते हैं। कुछ इसी तरह अपने चमत्‍कारिक गुणों के लिए प्रसिद्ध है महारुद्र रुद्राक्ष। महारुद्र रुद्राक्ष को ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। मान्‍यता है कि इस रुद्राक्ष पर त्रिदेवों की कृपा बरसती है।

महारुद्र रुद्राक्ष की खासियत

आपको जानकर हैरानी होगी कि महारुद्र रुद्राक्ष दुनिया का सबसे बड़ा रुद्राक्ष है और ये आपको आसानी से नहीं मिलेगा क्युकी ये काफी दुर्लभ रुद्राक्ष है। इस चमतकारिक महारुद्र रुद्राक्ष की लंबाई और चौड़ाई अन्य रुद्राक्ष की तुलना में काफी अधिक होती है। पूरी दुनिया में रुद्राक्ष का यह स्‍वरूप सबसे दिव्‍य और बड़ा है। यह महारुद्र रुद्राक्ष इंडोनेशिया में पाया जाता है।

महारुद्र रुद्राक्ष के लाभ

महारुद्र रुद्राक्ष पर त्रिदेवों का वास है इस कारण अगर आप इस रुद्राक्ष को अपने घर में स्‍थापित करते हैं तो इस रुद्राक्ष के स्‍वरूप में सदा ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश वास करते हैं।

महारुद्र रुद्राक्ष को अपने घर एवं दुकान में स्‍थापित करने से आपके घर-परिवार को बुरी नज़र और नेगेटिविटी से सुरक्षा मिलती है।

महारुद्र रुद्राक्ष को स्‍थापित करने से उस घर में रहने वाले लोगों को सेक्‍स ग्‍लैंड, रैड ब्‍लड सैल्‍स, पेट के विकार और ब्‍लड प्रेशर जैसी समस्‍याओं से छुटकारा मिलता है।

महारुद्र रुद्राक्ष आपके जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि का संचार करता है।

- इस रुद्राक्ष को अपने घर में स्‍थापित करने से आपको आत्‍मग्‍लानि और भय से मुक्‍ति मिलती है।

कैसे करें प्रयोग

महारुद्र रुद्राक्ष प्राप्त करने के बाद त्रिदेवों के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित करके आपको बस इसे अपने घर एवं ऑफिस के पूजन स्‍थल में स्‍थापित करना है।



Tuesday, 22 March 2016

होली का त्यौहार

होली का त्यौहार

होली का त्यौहार प्रहलाद की भक्ति और होलिका के दहन की कथा से जुडा है। दरअसल यह अग्नि, वह अग्नि है, जो सबके लिए सुख और सौभाग्य की सवाहक होकर अमंगल का विनाश करती है।
वेदों में अग्नि को देवताओ का मुख कह गया है, क्योंकि इसी के माध्यम से देवता सभी आहुतियो का स्वीकार करते है।

होलिका : अमंगल का दहन

प्रतीकरूप में होलिका के दहन की कथा सबके अमंगल के दहन की कथा है। ज्योतिष की दृष्टि से इस रात को किसी भी ग्रह की बाधा के शमन के उपाय के लिए श्रेष्ठतम अवसर माना जाता है।
परम्परा के रूप में आज भी सामान्यजन होलिका दहन के उपरान्त उसकी आंच में गेहूँ की बालिया सेंक कर घर लाते है। इस परम्परा का भावार्थ यही है, कि अब हमारे समस्त अमंगल को दूर करके अग्नि देव हमे और हमारे पुरे परिवार को सुख समृधि दे।
भारत एक कृषि प्रधान देश है। किसी भी कृषि प्रधान समाज में नई फसल की सिंकी बालियों के घर आने से बढकर सुख और समृधि का दूसरा आह्वान और क्या हो सकता है।
कोई भी आम आदमी इस पावन पर्व होली के अवसर पर किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करके होलिका की अग्नि में आहुति देकर अपने अनिष्ट ग्रहों और संकटों का निवारण कर सकता है।

आगे विस्तार से बताया गया है, कि किस चीज़ की आहुति देने से कौन से समस्या का निवारण हो सकता है।

1 जिन लोगो को अचानक किसी राजप्रकोप का सामना करना पड गया हो, राजकार्य में बाधा, नेत्र से सम्बंधित कोई परेशानी, हृदय रोग का सामना करना पड रहा हो तो उन्हें चाहिये कि वो तेजफल या मुठी भर गेहूँ होलिका की अग्नि में अर्पित करे और अपने संकटों को दूर करने की प्रार्थना करे। (पुरुष दाए हाथ की मुठी और स्त्री बाए हाथ की मुठी का प्रयोग करे).
2 व्यापार में घाटा, डिप्रेशन, वृद्ध महिलओं या विधवा औरतों से बिना किसी कारण वाद-विवाद, दोस्तों से तनाव या अनबन हो तो चावल, पोस्त का हरा पौधा, चांदी या फूटी कौड़ी की आहुति दे।
3 भाइयो से परेशानी, रक्त सम्बंधित रोग, भूमि से सम्बंधित वाद-विवाद आदि को दूर करने के लिए मल्का मसूर की दाल एक मुठी या नीम की सुखी पत्तियो आदि की आहुति दे।
4 बहन, बुआ, बेटी, वाणी, नसों से सम्बंधित रोग, दांतों के समस्या, मिर्गी, व्यापार के समस्या आदि होने पर एक मुठी साबुत मूंग की दाल की आहुति दे।
5 पिता, ब्राह्मण, शिक्षक, परिवार के बड़े बुजुर्ग या गुरुओ से अनायास ही वाद-विवाद होने लगे तो एक मुट्ठी चने की दाल या साबुत हल्दी की गाँठ होलिका की अग्नि में अर्पित करे।
6 दाम्पत्य सम्बन्धी विवाद, त्वचा सम्बन्धी रोग, गुप्त रोग या यौन सम्बन्धी रोगों के निवारण हेतु एक मुट्ठी जौ या कपास का पौधा या आलू की आहुति दे।
7 वाहन या मकान सम्बंधित समस्या, खाँसी के रोग से सम्बंधित समस्या होने पर साबुत बादाम या एक मुट्टी साबुत उड़द की दाल की आहुति दे।
8 अचानक आई विपत्तियों के लिए, विद्या में रूकावट या व्यवधान के लिए, ग़लतफ़हमी को दूर करने के लिए, बुनियाद रहित आशंकाओ के लिए या दिमागी बीमारियों से निजात पाने की चाह रखने वालो को जटा वाला सुखा नारियल या सिक्का आदि को होलिका की अग्नि में अर्पित करना चाहिये।
9 पुत्र सम्बन्धी परेशानी, रीड की हड्डी के समस्या, जोड़ो का दर्द, श्रवन दोष (सुनने की समस्या) होने पर एक छोटा प्याज़ या हरे निम्बू की आहुति दे।
10 होलिका दहन के शाम को अपने घर के मुख्यद्वार पर (चौखट पर) आटे का दो मुखी दिया जलाये और उस पर थोडा सा गुलाल छिड़क दे, इस उपाए से पूरा वर्ष आर्थिक हानी से बचे रहेंगे।
11 होलिका दहन के दिन पीपल के नीचे बैठकर 11 बार ‘’श्री राम जय राम जय जय राम’’ का जाप करने से मानसिक समस्या का निवारण होगा।

12 किसी भी नव विवाहिता ‘वधु’ को विवाह के प्रथम वर्ष में अपने ससुराल, ससुराल के गावं या शहर में होलिका दहन होते या होली जलते देखना शुभ नहीं माना गया है। इसी कारण विवाह के पश्चात् की प्रथम होली ‘वधु’ अपने मायके में ही मनाये, यही परम्परा चली आ रही है।   

Sunday, 20 March 2016

सन्तान प्राप्ति में बाधक ग्रहों के निश्चित " वैदिक -उपाय "

सन्तान प्राप्ति में बाधक ग्रहों के निश्चित " वैदिक -उपाय "

यदि जन्मपत्रिका के अनुसार सन्तान होने में सूर्य बाधा डाल रहा हो तो " हरिवंश पुराण " सुनना चाहिए । जिससे सन्तान प्राप्ति होती है। सूर्य को जल अर्पित करना चाहिये।

यदि चन्द्र बाधक हो तो भगवान शिव का पूजन तांत्रोक्त विधान से करना चाहिये।

यदि मंगल बाधक हो तो रुद्राभिषेक करें।

बुध बाधक हो तो काँसे के पात्र का दान, बुध के मन्त्र का पूर्ण जाप और सन्तान गोपाल स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। और साथ ही श्री गणेश रुद्राक्ष धारण करे और श्री गणेश चालीसा का ऊँचे स्वर में जाप करना चाहिये।

गुरु बाधक हो तो पित्तरों का श्राद्ध तर्पण पिंड इत्यादि तथा अमावस्या को वस्त्र भोजन दान करना चाहिए।

शुक्र बाधक हो तो गौ की सेवा , पीले रंग की गौ पालनी चाहिए तथा नित्यप्रति उसके दर्शन स्पर्श तथा ग्रास भोजन देना चाहिए।

शनि बाधक हो तो महामृत्युंजय का जाप करे। 

राहु बाधक हो तो ब्राह्मिन की कन्या का कन्यादान और १० ग्राम का चांदी का चौरस टुकड़ा अपने पास रखे। 

केतु बाधक हो तो कपिला गौ का दान करने से , सन्तान गोपाल का जाप , दधि त्याग प्रदोष      ( कामदेव )का व्रत पूजन करने से तथा सबसे उत्तम इस मन्त्र का जप करना चाहिए।
मंत्र :-- देवकी सुत गोविन्द , वासुदेव जगतपते ।
देहि में तनयं कृष्ण , त्वामहम शरण गत : ।।

उपरोक्त उपायों के साथ साथ पति-पत्नी दोनों को ही उत्तम क्वालिटी का गौरीशंकर रुद्राक्ष या गर्भ गौरी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिये। अस्तु