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Monday, 10 October 2016

घोर रूपिणी वशीकरण

घोर रूपिणी वशीकरण
यह साधना बहुत ही तीक्ष्ण प्रभाव रखती है। इसका उपयोग शत्रु, उच्च अधिकारी, रूठी हुई पत्नी या पति को वश में करने के लिए किया जाता है। यह भी ध्यान रखे के किसी भी अनुचित कार्य के लिए यह प्रयोग न करे अथवा आपको हानि होगी। इसका प्रयोग अपने शत्रु, उच्च अधिकारी, पत्नी अथवा पति को अनुकूल बनाने के लिए प्रयोग करे।
साधना विधि –
किसी भी अमावस्या, ग्रहण काल , दीपावली आदि शुभ मुहूर्त में शुरू करे, नीचे दिए गये मन्त्र का ११००० की संख्या में जाप करके (7 दिन में) सिद्ध कर ले फिर कोई भी खाद्य पदार्थ, भोजन आदि जब भी आप करने बैठे उसे 7 वार अभिमंत्रित कर जिसका भी नाम लेकर खाया जाता है उसका निश्चय ही वशीकरण हो जाता है और वह आपके अनुकूल कार्य करने लगेगा और आपकी आज्ञा का पालन करेगा।
१. किसी बेजोट पर एक लाल कपड़ा बिछा दे उसके उपर एक नारियल, तिल की ढेरी पर स्थापित करे।
२. नारियल का पूजन करे उस पर सिंदूर का तिलक करे धूप दीप आदि से घोर रूपिणी को स्मरण करते हुये पूजन करे।
३. मिठाई का भोग लगाए।
४. दिशा दक्षिण की तरफ मुख रखे।
५. आसन कंबल का ले या कोई भी ऊनी आसन ले ले।
६. माला काले हकीक या रुद्राक्ष की ठीक रहती है।
७. वस्त्र किसी भी तरह के पहन ले। इस साधना को शाम 8 से 10 बजे के बीच कभी भी शुरू कर ले।
८. मंत्र जाप पूरा हो जाए तो नारियल किसी भी शिव मंदिर या काली मंदिर में कुछ दक्षिणा के साथ चढ़ा दे और सफलता के लिए प्रार्थना करे।
९. गुरु पूजन और गणेश पूजन हर साधना में अनिवार्य होता है इसका ध्यान रखे।

मंत्र :-  || ॐ नमः कट विकट घोर रूपिणी स्वाहा ||


इच्छानुसार संतान प्राप्त करने के उपाय

इच्छानुसार संतान प्राप्त करने के उपाय
विवाहोपरांत दंपति को संतान प्राप्ति की प्रबल उत्कंठा होती है। आज जब लडकियां भी पढ लिखकर काफ़ी उन्नति कर रही हैं तो भी अधिकांश दंपतियों की दबे छुपे मन में पुत्र संतान ही प्राप्त करने की इछ्छा रखते हैं। यों तो संतान योग जातक की जन्मकुंडली में जैसा भी विद्यमान हो उस अनुसार प्राप्त हो ही जाता है फ़िर भी कुछ प्रयासों से मनचाही संतान प्राप्त की जा सकती है। यानि प्रयत्न पूर्वक कर्म करने से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
योग्य पुत्र प्राप्त करने के इच्छुक दंपति अगर निम्न नियमों का पालन करें तो अवश्य ही उत्तम पुत्र प्राप्त होगा. स्त्री को हमेशा पुरूष के बायें तरफ़ सोना चाहिये। कुछ देर बांयी करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बांया स्वर चालू हो जाता है। इस स्थिति में जब पुरूष का दांया स्वर चलने लगे और स्त्री का बांया स्वर चलने लगे तब संभोग करना चाहिये। इस स्थिति में अगर गर्भादान हो गया तो अवश्य ही पुत्र उत्पन्न होगा. स्वर की जांच के लिये नथुनों पर अंगुली रखकर ज्ञात किया जा सकता है।
योग्य कन्या संतान की प्राप्ति के लिये स्त्री को हमेशा पुरूष के दाहिनी और सोना चाहिये। इस स्थिति मे स्त्री का दाहिना स्वर चलने लगेगा और स्त्री के बायीं तरफ़ लेटे पुरूष का बांया स्वर चलने लगेगा। इस स्थिति में अगर गर्भादान होता है तो निश्चित ही सुयोग्य और गुणवती कन्या संतान प्राप्त होगी।

अगर किसी विशेष कारण से गर्भधारण नहीं हो रहा हो तो कुण्डली के अनुसार उपाय करें।